Monday, 27 February 2012

श्रमिक संगठनों-बैंकों की आज हड़ताल

 
नई दिल्ली। केन्द्र सरकार की कथित श्रमिक विरोधी नीतियों और आसमान छूती महंगाई के विरोध में देश के सभी ग्यारह मान्यता प्राप्त केन्द्रीय श्रमिक संगठन और सार्वजनिक तथा ग्रामीण बैंकों के कर्मचारी संगठन मंगलवार को देशव्यापी हड़ताल पर रहेंगे। देश के प्रमुख श्रमिक संगठनों भारतीय मजदूर संघ, इंटक, एटक, हिन्द मजदूर सभा, सीटू और एआईयूटीयूटी ने केन्द्र सरकार की श्रमिक विरोधी नीतियों और बढ़ती महंगाई को लेकर 28 फरवरी को देशव्यापी हड़ताल का आह्वान किया है। देश के 40 कर्मचारी महासंघों और बैंक कर्मचारी महासंघ ने भी इस हड़ताल को समर्थन देने की घोषणा की है। आयकर कर्मचारी महासंघ ने भी इस हड़ताल में शामिल होने की घोषणा की है। 

ये हैं प्रमुख मांगे

श्रमिक संगठनों ने हड़ताल के लिए 34 सूत्रीय मांग पत्र तैयार किया है जिसमें आयुध निमार्णियों के कर्मचारियों की मांगें भी प्रमुखता से रखी गई हैं। बिना अपवाद या छूट के सभी बुनियादी श्रम कानूनों का दृढ़ता से पालन किए जाने एवं उनका उल्लंघन करने वालों को कड़ी सजा दिए जाने की मांग भी की गई है।

श्रमिक संगठन असंगठित क्षेत्र के मजदूरों के लिए संसद की स्थायी समिति की सिफारिशों के अनुरूप पर्याप्त संसाधनों के साथ एक राष्ट्रीय सामाजिक कोष का गठन किए जाने की मांग कर रहे हैं। इसके अलावा केन्द्र और राज्यों की मुनाफा कमाने वाली इकाइयों का निजीकरण बंद करने की भी मांग रखी गई है। इसके अलावा न्यूनतम मजदूरी दस हजार रूपए निर्धारित करने की भी बात कही गई है। 

बालको में हड़ताल पर रोक

इस बीच सार्वजनिक क्षेत्र के भारत एल्युमिनियम कंपनी लिमिटेड (बालको) की कोरबा इकाई में हड़ताल करने पर स्थानीय श्रम न्यायालय ने रोक लगा दी है। बालको प्रबंधन की अर्जी पर श्रम न्यायालय ने कर्मचारियों को हड़ताल पर न जाने का निर्देश दिया।

बैंक कर्मचारियों का मिला साथ

भारतीय बैंक कर्मचारी महासंघ ने भी बैंक कर्मचारियों की समस्याओं को प्रमुखता से रखने के लिए इस हड़ताल में शामिल होने का निर्णय लिया है। वेतन और नियुक्तियां संबधी विसंगतियों को दूर करने के साथ 14 सूत्री मांगो को लेकर बैंक कर्मचारियों ने श्रम संगठनों के साथ मिलकर 28 फरवरी को एक दिवसीय राष्ट्रव्यापी हड़ताल पर जाने की घोषणा की है। 

बैंक कर्मचारी महासंघ ने सार्वजनिक बैंकों के निजीकरण, बैंकों के विलय, सार्वजनिक बैंकों में सरकारी हिस्सेदारी में कटौती, औद्योगिक घरानों को बैंक के लाइसेंस देने और मृतक कर्मचारियों के आश्रितों को अनुकंपा नियुक्ति देने और अशंकालिक कर्मचारियों को नियमित किए जाने के साथ ही पांच दिवसीय बैंकिंग सप्ताह लागू करने की मांग के समर्थन में हड़ताल पर जाने का फैसला किया है। 

क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के राष्ट्रीय महासंघ ने भी अपने कर्मचारियों के वेतन, भžो और सेवानिवृत्ति परिलाभ राष्ट्रीयकृत बैंकों के कर्मचारियों के अनुरूप करने तथा भारतीय राष्ट्रीय सहकारी बैंक की स्थापना जैसी मांगों को लेकर हड़ताल में शामिल होने का ऎलान किया है। 

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