Monday, 16 April 2012

कंटालिया में शॉर्ट सर्किट से लगी आग सीरवी परिवार की मां-बेटी जिंदा जलीं



   कंटालिया में शॉर्ट सर्किट से लगी आग सीरवी परिवार की मां-बेटी जिंदा जलीं
कंटालिया (पाली),बगड़ी के कंटालिया ग्राम में एक मकान में शॉर्ट सर्किट होने से लगी आग में कमरे सो रही मा- बेटी की जलकर मौत हो गई। पुलिस के अनुसार कंटालिया के मातावा बेरे पर रहने वाला कालूराम सीरवी अपनी आठ वर्षीय बेटी लक्ष्मी के साथ शनिवार सुबह आठ बजे शादी में शरीक होने के लिए मंडला गया हुआ था।
पीछे घर पर उसकी पत्नी सुखिया देवी व दो वर्षीय पुत्री नारंगी घर का कार्य कर अपने कमरे का दरवाजा अंदर से बंद कर टेबल पंखा लगाकर सो गई। अचानक 11 बजे कमरे से निकल रहे धुंए को देखकर बेरे के बाहर नाली निर्माण कार्य कर रहे लोग दौड़कर आए तथा दरवाजा तोड़कर अंदर पानी डालना शुरू किया। ग्रामीणों ने बताया कि अंदर सुखिया देवी 28 वर्ष तथा उसकी दो वर्षीय पुत्री बुरी तरह से जल कर मर चुकी थी। सूचना मिलने पर बगड़ीनगर एसएचओ जगदीश शर्मा, एएसआई विजयसिंह,सरपंच चुन्नीलाल माली, पूर्व सरपंच देवाराम सीरवी, नेमा राम सीरवी मौके पर पहुंचे। मृतका के ससुर चैनाराम सीरवी ने पुलिस को रिपोर्ट दी कि मेरी बेटी का मानसिक संतुलन ठीक नहीं था।
घर में रात को लगी आग, ग्रामीणों को सुबह चला पता । 

Friday, 13 April 2012

शादी के ग्यारह साल बाद एक साथ मिली तीन बेटियों की खुशी!


जोधपुर.दाऊ री ढाणी प्रतापनगर निवासी हैंडीक्राफ्ट व्यवसायी धर्मेद्र सांखला को बुधवार को उनके जीवन की सबसे बड़ी खुशी मिली। शादी के करीब 11 साल बाद उनकी पत्नी गायत्री ने बुधवार सुबह 11 बजे एक निजी हॉस्पिटल में करीब सवा घंटे चले ऑपरेशन के बाद कुछ सैकंड के अंतराल पर तीनों बेटियों को जन्म दिया। उन दोनों व उनके परिजनों का कहना है कि भगवान ने हमें छप्पर फाड़कर खुशियां दी है।



हैंडीक्राफ्ट व्यवसायी से जुड़े धर्मेद्र सांखला ने बताया कि संतान के लिए काफी इलाज भी कराया। आखिरकार 11 साल बाद भगवान ने उनकी झोली खुशियों से भर दी। धर्मेद्र के अनुसार एक साथ तीन बेटियों का पिता बनना जीवन की सबसे बड़ी खुशी है।शंकर नगर स्थित सूर्यनगरी हॉस्पिटल एवं वंगानी मेटरनिटी सेंटर, जहां गायत्री ने तीन बेटियों को जन्म दिया, की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. वीना वंगानी ने बताया कि करीब सवा घंटे चले ऑपरेशन के बाद गायत्री ने कुछ सैकंड के अंतराल में इन्हें जन्म दिया।



मां और बच्चियां पूर्णतया स्वस्थ हैं। तीन दिन हॉस्पिटल की देखरेख में रखने के बाद उन्हें घर भेज दिया जाएगा। शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. दीपक अग्रवाल ने बताया कि तीनों बच्चियों का वजन 1.5, 1.4 व 1.25 किलो है। निश्चेतना विशेषज्ञ डॉ. महेंद्र वंगानी और पप्पू खेतानी ने इस ऑपरेशन में सहयोग किया।



अनमोल हैं तीनों :



मां गायत्री भी एक साथ तीन बेटियां पाकर खुश हैं। उन्होंने कहा कि इनके आने से जीवन की सबसे बड़ी कमी पूरी हो गई। अपने साथ तीनों बच्चियों के स्वस्थ होने पर उन्होंने ईश्वर का शुक्रिया अदा करते हुए तीनों बच्चियों को अनमोल बताया।



तीन देवियां घर आई हैं :



एक साथ तीन पोतियां पाकर दादी गीतादेवी सांखला का चेहरा भी खिल गया। उन्होंने कहा कि घर में तीन देवियां आई हैं। उन्होंने बताया कि उनके बड़े बेटे के भी तीन लड़कियां और एक लड़का है। घर के लिए लड़कियां शुभ होती हैं। छोटे बेटे को भी भगवान ने छप्पर फाड़कर खुशियां दी है।

Sunday, 8 April 2012

बिलाड़ा : नियम विरूद्ध बनाई जा रही है आवासीय योजना, दक्षिण भारत के प्रवासी रहे जागरुक

बिलाड़ा : नियम विरूद्ध बनाई जा रही है आवासीय योजना, दक्षिण भारत के प्रवासी रहे जागरुक 

Tuesday, 3 April 2012

- श्री आई प्रकाश की एक भूली बिसरी यादें .......में हम आज आपको लिए चलते है , 80 के दसक में


दोस्तों हम आज आपको लिए चलते है , 80 के दसक में ,न जाने कितनो
का तो जन्म भी नहीं हुआ होगा , पर अतिथ के पन्नो में बात ही कुछ और है
हम बात कर रहे है एक ऐसी फिल्म की जिसने राजस्थान की सिर नाज से ऊपर कर दिया था , एक ऐसी फिल्म जिसने कुरीतियों को मिटाने में सहयोग दिया था , जिसने अपनी गोल्डन जुबली मनाई थी , वह गौरवपूर्ण दिन था 4 अक्टू,1988 सोजत क्षेत्र में बनी यह फिल्म आज भी लोगो के दिमाग में रमती है , जब याद आते वो दिन , एक तमन्ना फिल्म देखने की , जाने का कोई भी बहाना , जब टीवी का नहीं था जमाना , लोग पैदल चल कर देख आते थे , वाह! , क्या होगा वो मंझर, शायद में भी होता , लोगो के दिलो दिमाग में एक नशे की तराह छा गई थी , बनाने वाले और कोई नहीं
राजस्थान के ही लोग , अपनी मात्र भूमि के बन्दे , निमाज से मात्र 2 किलोमीटर पर है सांगावास जहा इन्होने जन्म लिया , फिल्म निर्माता और निर्देशक मोहन सिंह राठोड की जिन्होंने यह फिल्म निर्देशित की थी , क्या भोमली का वो लड़कपन , क्या ललिता पंवार की जगड़ालु निति , अपनी मनमानी निति सारे कम करवा लेती थी , क्या नीलू की अदा , जिसपे फ़िदा है वो गुजरा जमाना , अलंकार फिल का हीरो व् कालिया जिसके तेवर भोमली का वह डायलाग [ कालिया या तो अठा छु चला जा , नहीं तो या भोमली एक एक ने मार मार के खा जावेगी ] , रग़ रग़ में बसी खुबसूरत अदा से भरपूर यह फिल्म -[ बाई चली सासरिये ]- आज भी है यह प्रेरणा का स्रोत , जाते जाते आपको बतादू की इसी के तर्ज़ पर बनी फिल्म साज्जन का घर जो 1994 में फिल्मी गई थी जिसमे हिरोइन थी श्री जूही चावला ,व् ऋषि कपूर, आधी फिल्म अटबडा और पाली में बनी है :- श्री आई प्रकाश की एक भूली बिसरी यादें .......

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